शेयर बाजार में ESM Category क्या होता है – ESM Category Details In Hindi

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ESM का पूरा नाम Enhanced Surveillance Mechanism है, जो एक विशेष निगरानी तंत्र है जिसे शेयर बाजार में अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए लागू किया गया है। यह विशेष रूप से उन शेयरों पर नजर रखता है जो अत्यधिक उतार-चढ़ाव दिखाते हैं और जिनमें हेरफेर की संभावना हो सकती है। ESM Category, जो 2022 में लागू किया गया था, विशेष रूप से 500 करोड़ रुपये से कम मार्केट कैप वाली कंपनियों पर लागू होता है। इसका उद्देश्य बाजार में स्थिरता लाना और निवेशकों को सुरक्षित रखना है, हालांकि इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी हैं। अधिक जानकारी के लिए, आप सेबी या एनएसई की वेबसाइट पर जा सकते हैं।

ESM Category में आने वाले शेयरों पर लागू प्रतिबंध

  1. ट्रेडिंग टू ट्रेड मैकेनिज्म: ESM Category में शामिल शेयरों का व्यापार केवल ट्रेड टू ट्रेड मैकेनिज्म के तहत किया जा सकता है। इस मैकेनिज्म के अंतर्गत, शेयरों को एक बार में केवल एक ही बार खरीदा या बेचा जा सकता है, जो शेयर बाजार में हेरफेर को रोकने में मदद करता है।
  2. प्राइस बैंड: ESM Category के शेयरों के लिए एक निर्धारित प्राइस बैंड होता है, जिसका मतलब है कि ये शेयर केवल इस बैंड की सीमा के भीतर ही खरीदे या बेचे जा सकते हैं। यह प्रावधान अत्यधिक मूल्य उतार-चढ़ाव को रोकने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने में सहायक होता है।
  3. अतिरिक्त डिस्क्लोजर: ESM Category में शामिल कंपनियों को अपने वित्तीय और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का अधिक विस्तार से खुलासा करने की आवश्यकता होती है। इससे निवेशकों को कंपनी की वास्तविक स्थिति की सही जानकारी मिलती है, जिससे वे अधिक सूचित निवेश निर्णय ले सकते हैं।
शेयर बाजार में ESM Category क्या होता है - ESM Category Details In Hindi

ESM Category में शेयर क्यों आते हैं?

आइए समझते हैं कि ESM Category में शेयर क्यों आते हैं और इसके क्या मायने हैं।

क्या होता है जब शेयर ESM Category में आते हैं?

  1. शेयर की कीमत में अत्यधिक उतार-चढ़ाव: यदि किसी शेयर की कीमत ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखा रही हो, तो उसे ESM Category में डाला जाता है। यह कदम बाजार में स्थिरता लाने और निवेशकों को बड़े जोखिम से बचाने के लिए उठाया जाता है।
  2. कंपनी की वित्तीय स्थिति में गिरावट: अगर किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति में अचानक गिरावट आई हो, तो उसके शेयरों को ESM Category में रखा जा सकता है। यह निवेशकों को सचेत करने और अनजाने में निवेश करने से रोकने का एक तरीका है।
  3. शेयर में हेरफेर की संभावना: यदि ऐसा लगता है कि किसी शेयर में हेरफेर हो रहा है, तो उसे ESM Category में डाला जाता है। इससे उन लोगों को रोका जा सकता है जो अनुचित फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हों।

ESM Category के शेयरों का प्रभाव

नकारात्मक प्रभाव:

  • तरलता में कमी: जब कोई शेयर ESM Category में आ जाता है, तो उसकी तरलता में कमी आ जाती है। यानी उस शेयर को खरीदना-बेचना कठिन हो जाता है।
  • अनुपालन की जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं: ESM Category में शामिल कंपनियों पर अनुपालन संबंधी दायित्व बढ़ जाते हैं। उन्हें अधिक जानकारी साझा करनी पड़ती है और कड़े नियमों का पालन करना होता है।

सकारात्मक प्रभाव:

  • अस्थिरता में कमी: ESM Category में शामिल होने से शेयरों की अस्थिरता कम हो जाती है, जिससे छोटे निवेशकों की सुरक्षा होती है।
  • पारदर्शिता में वृद्धि: इस श्रेणी में शामिल कंपनियों को अधिक सूचनाएं साझा करनी होती हैं, जिससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ती है और निवेशकों को सही जानकारी मिलती है।
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ESM Category से बाहर निकलने की प्रक्रिया

ESM Category में आना एक कंपनी के लिए निगरानी की अवधि होती है, जिससे बाहर आने के लिए कंपनी को कुछ निर्धारित मानदंडों का पालन करना पड़ता है। आइए जानते हैं कि ये मानदंड क्या हैं और कंपनी को ESM Category से बाहर आने के लिए क्या करना पड़ता है।

मानदंड जिन्हें पूरा करना होता है:

  1. शेयर की कीमत में स्थिरता: कंपनी के शेयर की कीमत में स्थिरता आवश्यक है। अगर शेयर की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव कम होता है और एक स्थिर स्थिति बनी रहती है, तो यह कंपनी के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
  2. कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार: कंपनी को अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार दिखाना होता है। यह सुधार उसके लाभ, राजस्व, और अन्य वित्तीय पैरामीटर्स में देखा जा सकता है।
  3. नियमों का पालन: कंपनी को नियमों और नियामकों के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करना होता है। यह सुनिश्चित करता है कि कंपनी पारदर्शिता और अच्छे प्रबंधन के मानकों को मान रही है।

प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है:

  1. समीक्षा और मूल्यांकन: नियामक एजेंसियां कंपनी के प्रदर्शन और मानदंडों की पूर्ति की समीक्षा करती हैं।
  2. पारदर्शिता और सूचना साझा करना: कंपनी को अपने वित्तीय डेटा और अन्य सूचनाएं साझा करनी होती हैं, ताकि निवेशकों और नियामकों को कंपनी की सही स्थिति का पता चल सके।
  3. अनुमोदन और बाहर निकलना: जब नियामक संतुष्ट होते हैं कि कंपनी ने सभी आवश्यक मानदंडों को पूरा कर लिया है, तब कंपनी को ESM Category से बाहर निकालने की अनुमति दी जाती है।
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ESM Category के लाभ और हानि

लाभ:

  1. अस्थिरता को कम करता है: ESM Category उन शेयरों पर नजर रखता है जो अत्यधिक उतार-चढ़ाव को प्रदर्शित करते हैं, जिससे बाजार की अस्थिरता कम होती है और एक स्थिर वातावरण बनता है।
  2. छोटे निवेशकों की सुरक्षा करता है: इस तंत्र के माध्यम से छोटे निवेशकों को बाजार में होने वाली हेरफेर से बचाया जाता है, जिससे उनका निवेश सुरक्षित रहता है।
  3. बाजार में पारदर्शिता लाता है: ESM Category में आने वाली कंपनियों को अधिक जानकारी उपलब्ध करानी होती है, जिससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ती है।

हानि:

  1. तरलता को कम करता है: ESM Category में शामिल होने से शेयरों की तरलता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे उन्हें खरीदना और बेचना कठिन हो जाता है।
  2. कंपनियों पर अनुपालन का अतिरिक्त बोझ: ESM Category में आने वाली कंपनियों को अतिरिक्त नियमों और दिशानिर्देशों का पालन करना पड़ता है, जिससे उन पर अनुपालन का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता है।

ESM Category में शामिल होना कंपनी के लिए नकारात्मक संकेत नहीं है। यह एक सुरक्षात्मक कदम है जो शेयर बाजार की स्थिरता को बढ़ावा देता है और निवेशकों को सुरक्षित रखता है। अगर आप निवेशक हैं, तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि ESM Category में शामिल शेयरों में निवेश करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।

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